जितने उदार विचारों वाले आप
बनते हैं दुनिया वालों के सामने
काश! कि होते भी आप बिल्कुल
वैसे ही समानुभूति दिखाने वाले।
जब आप जैसे महान विचारों वाले
तुर्रमखां जैसे कितने ही विद्वानों पर
कभी नजर पड़ जाती है मेरी यूं ही
घूमते-घामते सोशल मीडिया वाली
नगरी में तो आश्चर्य की कोई सीमा
नहीं होती क्योंकि दिख ही जाते हैं
वो जिसे देख रखा है मैंने करीब से
पर कहां वो शक्की मिजाज वाला
और यहां ये इतने सभ्य, समझदार
खुले विचारों वाले, मृदुभाषी माहौल
में इन गिरगिटों की टोली में लगता है
जैसे एक और गिरगिट आ गिरा हो।
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