Saturday, August 22, 2020

बकलोल ________

बकलोल______________

पिंटू जी , इसी नाम से मशहूर हैं वो  अपने मोहल्ले मे । काफी रसिया किस्म के, जवानी के दिनों में लङकी भगा चुके है पर ये अलग बात है कि शादी घरवालो की मरजी से की।बेचारी लङकी कहीं और ब्याह दी गई ।पत्नी जी को कहानी सुना कर बकलोल की उपाधी भी पा चुके हैं।अभी पचास पचपन की उम्र के होगे पर दिल बीस पच्चीस की उम्र का रखते है ।अपने बालों को हमेशा काला रखते है उनके सामने तो उनका बेटा ही बङा भाई सा दिखायी देता है। किसी भी महिला के  दिल मे फटाक से उतर जाने का हुनर रखते है । उनके मोहब्बत निभाने की कुल वैलिडिटी यही कोई पांच से सात महिने, और अगर आगे तक बात ना बनी तो साल भर एङी चोटी का जोर लगा कर काम बना ही लेते है ।अपनी नवोदित प्रेमिका मे ही जहां उन्हे सारे जहान की सुन्दरता और अच्छाई दिखती है , वैलिडिटी खत्म होने के कगार पर ऐ सारे गुण उनको अपनी पत्नी जी मे दिखने लग जाते है। भूल सुधार करने में तनिक भी देर ना लगाते हुए पत्नी जी से अपने-आप को छिनने का तोहमत भी बेचारी नवोदित प्रेमिका पर मढ़ डालते हैं,  हर बार जब बात हद से गुजर जाती है, तब इंट्री होती है उनकी सुन्दर, सुशील,गुणवान,  चरित्रवान पतिव्रता अर्धांगिनी जी की । जो अपने महान पतिदेव जी को बकलोल की उपाधि देकर  गृह क्लेश और चंडी रूप धारण कर इस बात की कसम खिला कर छोडती है कि ऐ  चरित्रहीन औरत उनकी आखिरी सौतन यानि की आखिरी बेवकूफी है अब किसी को कोई भी सहानुभूति नही दिखानी है जरा सा उंगली क्या दी  ये तो गर्दन ही पकङ ली ।और अब उनका काम होता है साए की तरह या फिर यूं कहे फेविकोल की तरह हर वक्त चिपक कर रहना ।पिंटू जी वैसे तो मधुमेह के रोगी है पर उनकी पत्नी जी उनके खाने का विशेष ध्यान रखते हुए पङोसन द्वारा बताए गए पहुंचे हुए बाबा जी की खास तंत्र मंत्र से बनाए गए भभूत को पिंटू जी के लंच डिनर मे नमक चीनी शुगर फ्री मे मिला कर तब तक खिलाती है और जब तक की वो अपनी तरफ से ठोक बजा कर निश्चिंत नहीं हो जाती है कि बाबा जी का भभूत काम कर गया। लेकिन एक ही मलाई खाते खाते पिंटू जी की  रसमलाई खाने की इच्छा फिर से प्रबल हो जाती है और फिर दफ्तर मे देखते क्या है ! एक परेशान सी दिखने वाली जवान विधवा कर्मचारी की नियुक्ति हुई है । उनदोनों के शब्दों में कहा जाए तो एक चरित्रहीन औरत ।

Friday, August 21, 2020

मुखौटा धारी________

होता है आश्चर्य बहुत 
जब व्यक्ति कोई कुंठाग्रस्त
नाचती उसके इशारे पर 
करती घर की चाकरी 
अपनी औरत को अपना है
आधा अंग बताता , कभी भी 
उसका होता नहीं, फिर भी समाज में
है झूठा प्रेम दिखाता, ना देता सम्मान 
कभी, बस बातें खूब बनाता, 
सारी बातें झूठी कहता, 
सबको यही दिखाता ,पर 
छला हो जिसने अपने को 
वो क्या देगा सम्मान किसी को
इज्जत मान हर नारी की 
बातें सभी किताबी उसकी 
रंगा सियार का रंग भी आखिर
बदरंग तो हो ही जाना है ,
आधुनिक अकेली वेवा
साक्षर हर वो महिलाएं
कहता जिसे वो, बदचलन
दिखती उसको कटी पतंग सी
ऐसी हर वो नारी, जिसका
बन रक्षक करते शिकार 
ऐसे मुखौटा धारी, अक्सर
डोर सहित करता है वो हर 
उस पतंग को लूटने की तैयारी.....

बिना तुम्हारे

पांच वर्ष ऐ ऐसा बीता बिना तुम्हारे__________________
जैसे बेलें बिखरी हुई हो बिना सहारे___________________

Saturday, August 1, 2020

छुपे एहसास_________

वो जो तुम्हारे लिखे
चंद अल्फाज थे,
वो किसी नासूर से
कम ना थे मेरे लिए
तुम्हारे अल्फाजों की
ताखों में आज भी
कुछ दरारें दिखाई
देती रहती है 
उन लफ़्ज़ों की 
दरारों से ताजा-तरीन
तुम्हारे एहसासों से 
मुलाकात हो जाती है
अक्सर, और वो 
तड़प भी दिख 
जाती है,जो ढका है 
तुमने बड़ी ही 
सुगमता से 
सबसे छुपा के।

बेतुकी सी.....

कभी इक गौरैये को देखकर 
जिन्होंने बंद कर ली थी 
खिड़कियां अपने घर की,
वो अब अपने कमरे के पर्दे 
हटा कर सुनाते हैं अक्सर
बेतुकी सी ,बेमतलब की
गुंटर- गूं अपनी......

आप तो ऐसे ना थे________

जितने उदार विचारों वाले आप  बनते हैं दुनिया वालों के सामने काश! कि होते भी आप बिल्कुल वैसे ही समानुभूति दिखाने वाले। जब आप जैसे महान विचारों...