Wednesday, May 19, 2021

मुक्त______

 

बेजान हो चुकी

बेनाम सी इस

बेतरतीब बन्धन में 

उलझे हुए रिश्ते से 

मुक्त क्या तुम

कभी हो पाओगे ?

मन का तराजू 

जो है तुम्हारे पास 

सही क्या ग़लत क्या

तुम्हें तो सब कुछ

होता है पता, है ना

तुम्हारे शब्दों में

वो उन्मुक्त होना

एक दिन तो 

सबको होना है 

पर कुछ बेचैन से 

मेरे सवालों में 

अब तक हैं उलझे 

सुलझा लो ना 

तब होना उन्मुक्त।

No comments:

Post a Comment

आप तो ऐसे ना थे________

जितने उदार विचारों वाले आप  बनते हैं दुनिया वालों के सामने काश! कि होते भी आप बिल्कुल वैसे ही समानुभूति दिखाने वाले। जब आप जैसे महान विचारों...