उम्र तो जैसे हाथों से रेत की तरह फिसलती रही, और
हम अभी तक मुट्ठियां भिंचे अपनी , खुद पर इतराते रहे।
जब निगाह आईने पर पड़ी आज , यकायक
सफेद पड़े बाल और झुर्रिदार चेहरे ने पूछ डाला ;
डरावना सा इक सवाल, हां तो बताओ
इस बार का जन्म दिन कहां मनाओगे?
जितने उदार विचारों वाले आप बनते हैं दुनिया वालों के सामने काश! कि होते भी आप बिल्कुल वैसे ही समानुभूति दिखाने वाले। जब आप जैसे महान विचारों...
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