गौरव भईया के आए फोन ने नेहा को स्तब्ध कर दिया ,आंखों से अविरल बह रहे आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे ,पापाजी की ऐसी मृत्यु होगी ! कितने खुश थे वो जब गौरव भईया ने कहा था कि वो इस बार पापाजी को अपने साथ अमेरिका लेकर जाएंगे कहते थे बेटियों पर बोझ नहीं बनना चाहते वो मुक्ति तो उन्हें बेटा ही दिलायेगा, पापाजी की जान बसती थी गौरव भईया में। जबसे गौरव भईया की नौकरी एक विदेशी कंपनी में हुई उनकी पोस्टिंग भी न्यूयार्क में हो गई पर उस वक्त वो मां तथा पापाजी को वहां रखने की स्थिति में नहीं थें, कारण उनका छोटा फ्लैट था तबसे दोनों बहने ही मां पापाजी के पास बारी-बारी से आती-जाती रहती थी पिछले साल मां भी हमारे बीच नहीं रही तबसे पापाजी को नेहा ज़बरदस्ती अपने साथ ले आई थी अक्सर पापाजी को उदास देख कर एक दिन उसने कहा भी था क्या पापा अपने इंडिया में ऐसा क्या नहीं है जो अमेरिका में है तब पापाजी का ज़बाब सुन कुछ बोल नहीं पाई थी, उन्होंने कहा कि यहां मेरा बेटा नहीं है अब भगवान का बुलावा कब आ जाए क्या पता मुझे मोक्ष तो आखिर उसके ही हाथों मिलेगा ना बेटा ,पापाजी के ऐसी सोच पर हंसी भी आ जाती थी। इस बार छुट्टीयों में जब गौरव भईया और भाभी भारत आए पापाजी को अपने साथ ले गए पापाजी की खुशी तब देखते ही बन रही थी, लेकिन वहां पर थोड़े दिन पहले ही पापाजी की तबीयत ख़राब हुई जांच में पता चला कि वो कोरोना महामारी के चपेट में आ गए हैं तबसे वो वही के एक बड़े अस्पताल में ही भर्ती थे ,आज जब पापाजी का देहांत हुआ तब गौरव भईया तो उनकी आखिरी दर्शन भी ना कर पाए उन्हें बेटे के हाथों मोक्ष तो क्या उनका अंतिम संस्कार भी वहां के सरकार के बनाए नियमों के तहत सामूहिक रूप से एक कब्र में दफ़न कर किया गया था , पापाजी की ऐसी दुखद विदाई होगी उनके किसी दुश्मन ने भी ऐसा नहीं सोचा होगा। नेहा बार- बार नीतू दीदी से कह रही थी क्या पापाजी को हम बेटियां मोक्ष नहीं दिला सकती थी ?
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