Wednesday, May 19, 2021

तुम्हारी आखिरी मुहब्बत...

 

हम जैसों की उम्र 

जब अपने ढलान 

पर होती है , तो

जाहिर है ; तब 

जरुरत एक ऐसे 

साथ की होती है 

जो बांटे हर दर्द,

हर ग़म हर खुशी

बिना नफे नुकसान के  

कई होते हैं ऐसे भी

पास जिनके सिर्फ 

किसी का साथ होता है 

किसी के पास 

सिवाय एक एहसास

कुछ पास नहीं होता है

होते है ऐसे भी कई 

जो साथ किसी के होते है 

फिर भी उन्हें तलाश 

किसी खास की होती है 

विरले ही होते हैं

तुम जैसे शायद

जो ताउम्र सच है 

छुपाते मन में

किसी और को 

बसा कर दिल में

उस साथ भर को

अपनी आखिरी प्यार

बताते हैं , चलो छोड़ो

अब तो मान लो 

कि तुम्हारे दिल में 

किसी के लिए

इक कोना आज भी है, 

शायद! सच कहने से 

कतरा रहे हो, है ना

रहा होगा आज

कोई खास दिन 

तुम्हारे निभाये गए

इस रिश्ते का

पर तुम्हारी उस 

आखिरी मुहब्बत के

'मौत' तुम्हारी प्रेमिका 

ये मौत भी कभी 

किसी की मुहब्बत 

हुई है भला! पर

तुमने कहा तो 

तुम्हारी कही

चलो मान लेते हैं

उसे तुम्हारे पास 

आने से पहले

जानना चाहेंगे 

हम भी उसे, 

जिसके पास होने का 

तुम्हें नहीं होता

कभी भी एहसास 

शायद वो भी कभी 

हुआ करती थी ख़ास 

पर हर बार तुम्हारा 

उस साथ भर को

यकीन दिलाना कि

तुम ही बस उसकी 

जान हो जहान हो 

शक पैदा करता है 

मन में होती है

जब सच्ची मुहब्बत 

तो आंखों में 

दिख जाती है 

नहीं पड़ती है जरूरत

जताने की बताने की 

बार-बार समझाने की

तो फिर उम्र के 

इस आखिरी पड़ाव पर

सच तो कह दो 

क्या मन में अपने 

एक बोझ लिए 

अपनी आखिरी मुहब्बत

हां उसी आखिरी मुहब्बत

से मिला पाओगे नज़र ? 

बोलो तनिक बोलो ना .....

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