रिश्ते बनाए तो
बड़ी आसानी से
जाते हैं , लेकिन
निभाने में बहुत
मुश्किल होती है,
ओस की बूंद सी
जाड़े की धूप सी
जैसे कई सारे मिलते हैं
उसे नाम पर फिर भी
वो खास रिश्ता
अनाम हो जाता है
उनकी नज़र में ,
कायर होते हैं वो
जो बड़ी आसानी से
एक खुबसूरत रिश्ते को
बदनाम करने की
साज़िश रचते हैं
ओढ़ कर समाज के
डर का ओछा सा लबादा
अब अपने धर्म का
निर्वाह करते हैं
खुद हो जाते हैं गुमनाम,
लगा कर कलंक
करके उसको बदनाम,
खुद को करके पाक साफ
उन जैसों के लिए ही
ख़ास रिश्ते हराम होते हैं
मुकर जाने से उसके
रिश्ते अनाम हो गए
पूछो तो कभी उनसे
जो जीते हैं बड़ी ही
शिद्दत से इस आधे
अधूरे से रिश्ते को
उनके लिए यह
आधा सा रिश्ता
ही उनकी जिंदगी
तमाम होती है
रिश्ते कभी अनाम
नहीं होते, हो जाते हैं
बेनाम वो जो
इस रिश्ते में
बदनाम होते हैं______
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