Wednesday, May 19, 2021

बनावटी से तुम______

 चौंक उठी थी उस दिन मैं

जब देखा था मैंने रुप तुम्हारा

खिलखिलाता सा वो चेहरा

दिख गया था अनायास ही मुझे

एक दिन उस राह से गुजरते हुए

सोचने पर मजबूर हो गई मैं

कि ऐसी हंसी तुम्हारी कभी

मुझे क्यों न दिखी कभी 

क्या तुम बनावटी थे?

जो हरवक्त गंभीर था कभी 

क्या मेरी उपस्थिति से नाखुश था?

वो चेहरा तो खुलकर हंसता है 

मुस्कुराता और ठहाके लगाता है।

पर यह सवाल तो जो आज भी 

मुझे तड़पा रहा है चिढ़ा रहा है

क्यों -क्यों आखिर क्यों उसके मुख पर 

मुझे मौन ही दिखता रहा अक्सर? क्यों.......

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