Wednesday, May 19, 2021

ताना-बाना.......

 तुम उलझे रहो

अपने ही बुने हुए

ताने-बाने में

कभी चांद सा

धुंधला, चमकीला

तो कभी इन्द्रधनुषी

सतरंगी रिश्ते के

अपने प्रेम प्रदर्शन

कभी उसके उलाहने का

कभी रुठने मनाने का

सब कुछ इस रिश्ते में

ढकोसला मात्र है

इन दिखावटी लीलाओं

की बुनियाद इनके

रिश्ते की तरह ही

अन्दर से खोखली होती है

कितना भी ढक लो

जाने कितनी दफा हिलती है

खिसकती है ! हां कानूनी,

सामाजिक या पारिवारिक

डर से मरम्मत का कार्य

साल दर साल होता है

आज ऐसे ही एक

हमसाया हमसफ़र

इक दूजे के पूरक

कहलाने वाले जीवनसाथी

के एक की विदाई के

क्षण में निर्जिव होते

शरीर से पहले ही उनके

अंगूठे के छाप लिए जाने का

कार्यक्रम शीघ्रअतिशीघ्र

किया जाता दिखा तनिक भी

आंखों में बिछड़ने का दुख नहीं

वरन् डाटा ट्रांसफर की जल्दी

ज्यादा दिखी तो समझ आई

कि ऐसे होते हैं

प्यार भरे रुहानी रिश्ते

जिनका एहसास सिर्फ

तारों की छांव में होता है

हां! ऐसा मैंने माना है

मतलब परस्त इस जहान में

सब रिश्ते मतलबी,

मायावी , दिखावटी है

तो उलझे रहो

अपने ही बुने हुए

ताने-बाने में।

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